रजिस्ट्री के बाद कब तक कर सकते हैं दाखिल-खारिज? जानें जरूरी नियम और समय सीमा! Jamin Dakhil Kharij Rules 2025

Jamin Dakhil Kharij Rules 2025: जमीन या प्रॉपर्टी खरीदने के बाद रजिस्ट्री कराना बहुत जरूरी होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रजिस्ट्री के बाद एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है जिसे दाखिल-खारिज कहते हैं? दाखिल-खारिज प्रॉपर्टी के स्वामित्व को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया है। इसे म्यूटेशन (Mutation) भी कहा जाता है।

दाखिल-खारिज कराना बहुत जरूरी है क्योंकि इसके बिना आपको प्रॉपर्टी पर पूरा कानूनी अधिकार नहीं मिलता। लेकिन सवाल यह है कि रजिस्ट्री के बाद कितने समय के अंदर दाखिल-खारिज कराना चाहिए? इस लेख में हम इसी विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे और जानेंगे दाखिल-खारिज से जुड़े सभी जरूरी नियम और समय सीमा।

दाखिल-खारिज क्या है?

दाखिल-खारिज एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए किसी प्रॉपर्टी के नए मालिक का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। इसमें दो चरण होते हैं:

  1. दाखिल: नए मालिक का नाम रिकॉर्ड में शामिल करना
  2. खारिज: पुराने मालिक का नाम रिकॉर्ड से हटाना

दाखिल-खारिज कराने से आप प्रॉपर्टी के कानूनी मालिक बन जाते हैं। इससे आपको कई फायदे मिलते हैं जैसे:

  • प्रॉपर्टी पर पूरा अधिकार मिलना
  • बैंक लोन लेने में आसानी
  • प्रॉपर्टी बेचने में कोई दिक्कत न होना
  • कानूनी विवादों से बचाव

दाखिल-खारिज की जानकारी

विवरणजानकारी
प्रक्रिया का नामदाखिल-खारिज (Mutation)
उद्देश्यप्रॉपर्टी के नए मालिक का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करना
समय सीमारजिस्ट्री के 30-45 दिन के अंदर (राज्य के हिसाब से अलग-अलग)
जरूरी दस्तावेजरजिस्ट्री की कॉपी, आईडी प्रूफ, फोटो, आदि
प्रक्रियाऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन
शुल्कराज्य के हिसाब से अलग-अलग (सामान्यतः 500-2000 रुपये)
विभागराजस्व विभाग
अधिकारीतहसीलदार या नायब तहसीलदार

दाखिल-खारिज की समय सीमा

रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज कराने की समय सीमा अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकती है। लेकिन सामान्य तौर पर यह समय सीमा 30 से 45 दिन के बीच होती है। कुछ प्रमुख राज्यों की समय सीमा इस प्रकार है:

  • उत्तर प्रदेश: 30 दिन
  • बिहार: 35 दिन
  • हरियाणा: रजिस्ट्री के तुरंत बाद (इंतकाल के नाम से जाना जाता है)
  • दिल्ली: 45 दिन
  • महाराष्ट्र: 90 दिन

ध्यान रहे कि यह समय सीमा समय-समय पर बदल सकती है। इसलिए अपने राज्य के नवीनतम नियमों की जानकारी जरूर रखें।

दाखिल-खारिज के लिए जरूरी दस्तावेज

दाखिल-खारिज कराने के लिए आपको कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होंगे। ये दस्तावेज हैं:

  • रजिस्ट्री की मूल प्रति
  • आईडी प्रूफ (आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, आदि)
  • पासपोर्ट साइज फोटो
  • प्रॉपर्टी के पिछले मालिक का नाम और पता
  • प्रॉपर्टी का विवरण (खसरा नंबर, खतौनी नंबर, आदि)
  • बैंक खाता विवरण

दाखिल-खारिज की प्रक्रिया

दाखिल-खारिज कराने की प्रक्रिया अब ज्यादातर राज्यों में ऑनलाइन हो गई है। लेकिन कुछ जगहों पर अभी भी ऑफलाइन प्रक्रिया चलती है। आइए दोनों तरीकों को समझें:

ऑनलाइन प्रक्रिया

  1. अपने राज्य के राजस्व विभाग की वेबसाइट पर जाएं
  2. दाखिल-खारिज या म्यूटेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें
  3. जरूरी दस्तावेज अपलोड करें
  4. फीस का भुगतान करें
  5. आवेदन सबमिट करें और रसीद प्रिंट कर लें

ऑफलाइन प्रक्रिया

  1. तहसील कार्यालय जाएं
  2. दाखिल-खारिज के लिए आवेदन फॉर्म लें और भरें
  3. जरूरी दस्तावेज जमा करें
  4. फीस का भुगतान करें
  5. रसीद प्राप्त करें

दाखिल-खारिज न कराने के नुकसान

अगर आप समय पर दाखिल-खारिज नहीं कराते हैं तो आपको कई तरह के नुकसान हो सकते हैं:

  • प्रॉपर्टी पर पूरा कानूनी अधिकार नहीं मिलेगा
  • बैंक लोन लेने में दिक्कत हो सकती है
  • प्रॉपर्टी बेचने में समस्या आ सकती है
  • कानूनी विवाद खड़े हो सकते हैं
  • जुर्माना भरना पड़ सकता है

दाखिल-खारिज की फीस

दाखिल-खारिज कराने के लिए एक निश्चित फीस देनी होती है। यह फीस अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः यह फीस 500 से 2000 रुपये के बीच होती है। कुछ राज्यों में प्रॉपर्टी की कीमत के हिसाब से फीस तय की जाती है।

दाखिल-खारिज के बाद क्या करें?

दाखिल-खारिज कराने के बाद आपको कुछ और काम करने होंगे:

  1. दाखिल-खारिज का सर्टिफिकेट प्राप्त करें
  2. प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड अपडेट कराएं
  3. बिजली और पानी के कनेक्शन अपने नाम पर करवाएं
  4. बीमा पॉलिसी अपडेट कराएं

दाखिल-खारिज से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण बिंदु

  1. समय सीमा का पालन करें: रजिस्ट्री के बाद जल्द से जल्द दाखिल-खारिज करवा लें।
  2. ऑनलाइन प्रक्रिया को प्राथमिकता दें: यह तेज और आसान होती है।
  3. सभी दस्तावेज सही रखें: गलत या अधूरे दस्तावेज से आवेदन रद्द हो सकता है।
  4. फीस का सही भुगतान करें: कम या ज्यादा भुगतान से प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
  5. रसीद संभालकर रखें: भविष्य में जरूरत पड़ सकती है।
  6. स्टेटस चेक करते रहें: ऑनलाइन या तहसील कार्यालय में जाकर स्टेटस चेक करें।
  7. विवाद की स्थिति में तुरंत कार्रवाई करें: अगर कोई आपत्ति आती है तो तुरंत जवाब दें।
  8. सर्टिफिकेट सुरक्षित रखें: दाखिल-खारिज का सर्टिफिकेत एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

दाखिल-खारिज से जुड़े कुछ सवाल-जवाब

Q1: क्या दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री एक ही चीज है?

A: नहीं, रजिस्ट्री प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री का दस्तावेज है, जबकि दाखिल-खारिज सरकारी रिकॉर्ड में मालिक का नाम बदलने की प्रक्रिया है।

Q2: क्या पुरानी प्रॉपर्टी का भी दाखिल-खारिज कराना जरूरी है?

A: हां, अगर आपने कोई पुरानी प्रॉपर्टी खरीदी है तो उसका भी दाखिल-खारिज कराना जरूरी है।

Q3: क्या दाखिल-खारिज के लिए वकील की जरूरत होती है?

A: जरूरी नहीं है, लेकिन अगर आपको प्रक्रिया समझ नहीं आ रही है तो वकील की मदद ले सकते हैं।

Q4: अगर दाखिल-खारिज में देरी हो जाए तो क्या करें?

A: जल्द से जल्द आवेदन करें और देरी का कारण बताएं। कुछ राज्यों में लेट फीस देकर भी दाखिल-खारिज करवाया जा सकता है।

Q5: क्या एक से ज्यादा लोगों के नाम पर दाखिल-खारिज हो सकता है?

A: हां, अगर प्रॉपर्टी संयुक्त रूप से खरीदी गई है तो सभी मालिकों के नाम दर्ज किए जा सकते हैं।

निष्कर्ष

दाखिल-खारिज एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो आपको प्रॉपर्टी का कानूनी मालिक बनाती है। रजिस्ट्री के बाद इसे जल्द से जल्द करवा लेना चाहिए। हर राज्य के अपने नियम और समय सीमा हो सकती है, इसलिए अपने राज्य के नियमों की जानकारी रखें। सही दस्तावेज और प्रक्रिया का पालन करके आप आसानी से दाखिल-खारिज करवा सकते हैं।

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अस्वीकरण (Disclaimer):

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसमें दी गई जानकारी समय-समय पर बदल सकती है और हर राज्य में नियम अलग-अलग हो सकते हैं। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी महत्वपूर्ण कानूनी या वित्तीय निर्णय से पहले संबंधित सरकारी विभाग या कानूनी विशेषज्ञ से परामर्श लें। लेख में दी गई जानकारी की सटीकता और पूर्णता की गारंटी नहीं दी जा सकती।

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